मध्यप्रदेश

Syrup given for fever is non-standard | बुखार में दिए जाने वाला सिरप अमानक: लेडी एल्गिन अस्पताल में हुई थी 20 हजार सप्लाई, बची सिर्फ 400; रिपोर्ट भेजी मुख्यालय – Jabalpur News


बुखार में बच्चों को दिए जाने वाली पेरासिटामोल सीबी सिरप को अमानक बताते हुए फेल कर दिया गया है। यह वही सिरप है जिसे के प्रदेश में पहली बार 29 सितंबर 2022 को गुना जिले में भेजा गया था, जहां के ड्रग इंस्पेक्टर ने अक्टूबर 2022 को अपनी जांच रिपोर्ट में इस

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भोपाल लैब में सिरप के सेंपल का टेस्ट हुआ जहां वह स्टैंडर्ड क्वालिटी की नहीं मिली। पेरासिटामोल सीबी पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन सिरप जबलपुर के जिला अस्पताल,मेडिकल कॉलेज,एल्गिन अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्र में बांटी गई थी। महाकौशल के सबसे बड़े लेडी एल्गिन अस्पताल में 20 हजार बॉटल्स दी गई थी, जिसमें कि स्टॉक में सिर्फ 400 बॉटल्स ही शेष बची है। जबलपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय मिश्रा का कहना है कि पेरासिटामोल सीबी पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन का किसी भी बच्चे पर विपरीत असर नहीं पड़ा है।

बच्चो को बुखार में दी जाती है
जबलपुर के सीएमएचओ डॉ संजय मिश्रा ने बताया कि बच्चों में बुखार की समस्या को ठीक करने के लिए दी जाने वाली सिरप पेरासिटामोल सीबी पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन को जांच के दौरान फेल किया गया है। यह दवा शासकीय रानी दुर्गावती (लेडी एल्गिन) अस्पताल में बच्चों को उपचार के दौरान दी जा रही थी। अभी तक 20 हजार में से 19 हजार 600 सिरप बांट दिए गए है, अस्पताल में सिर्फ 400 बॉटल्स ही शेष है। सीएमएचओ के मुताबिक शासकीय अस्पताल में सरकार की एक एजेंसी के माध्यम से इन दवाओं की सप्लाई की जाती है। समय-समय पर ड्रग इंस्पेक्टर सैंपलिंग कराकर दवाओं की जांच भी करते है। हाल ही में जबलपुर डीआई ने जब सिरप की सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल भेजा तो वह अमानक निकाला जिसकी रिपोर्ट जैसे ही मेल के माध्यम से मिली तो यह जानकारी मुख्यालय भोपाल दी गई। दवा का उपयोग रोक दिया गया है। संबंधित कंपनी पर राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जाएगी।

इसलिए बताया गया दवा को अमानक
सीएमएचओ डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि किसी भी सिरप को उपयोग करने से पहले उसे सेक करते हुए हिलाया जाता है। इसके बाद सिरप अच्छे से मिल जाता है, और फिर उसका उपयोग किया जाता है। पर जिस सिरप को बच्चों के लिए हर सरकारी अस्पताल में बांटा गया था वह डिजोल्व नहीं हुआ, जिसके कारण उसे अमानक बताया गया। सिरप के सेक करने के बाद भी अच्छे से नहीं मिला और गाढ़ा नहीं हुआ। बॉटल्स की तली में दवा जमी रही, और मिक्स नहीं हुई, यही कारण था कि इसे अमानक घोषित किया गया है।

400 बॉटल्स ही शेष बची है

जबलपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि दवा निर्माता कंपनी द्वारा 60 एम.एल क्षमता की 20 हजार से ज्यादा शीशी की लेडी एल्गिन अस्पताल में सप्लाई की गई। जिसमें कि सिर्फ 400 बॉटल्स ही शेष बची है। जबलपुर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग जबलपुर द्वारा गत वर्ष 13 जुलाई 2023 को रैंडम सैंपलिंग में इस दवा का सैंपल लिया गया था। सैंपल की जांच भोपाल की लैब में की गई, जिसकी रिपोर्ट इसी वर्ष मार्च माह में आई. रिपोर्ट में दवा को स्टैंडर्ड क्वालिटी का नहीं पाया गया. जांच रिपोर्ट में सिरप स्टैंडर्ड क्वालिटी का नहीं पाए जाने के बाद अस्पताल में इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई. लेकिन इस दौरान तकरीबन 90 फीसदी दवा बच्चों को पिलाई जा चुकी थी।


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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