Bribe rate is higher in Indore than Bhopal: | भोपाल की तुलना इंदौर में रिश्वत का रेट हाई: सर्विस प्रोवाइडर बोले, पैसे नहीं दोगे तो अधिकारी सालों तक चक्कर कटवाते रहेंगे – Madhya Pradesh News

माता-पिता ने जिंदगीभर की कमाई जोड़कर इंदौर में एक प्लॉट खरीदा, जब हम उसकी रजिस्ट्री कराने के लिए सर्विस प्रोवाइडर की मदद लेने गए, तो उसने बताया कि आपको शासकीय शुल्क के अलावा 5000 रुपए देने होंगे। मैंने उससे पूछा कि स्लॉट बुक करने और रजिस्ट्री टाइप करन
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मैंने सर्विस प्रोवाइडर की मदद लिए बगैर रजिस्ट्री करवाने की कोशिश की। मगर, मुझसे दफ्तर के कई चक्कर लगवाए। थक हारकर मैंने सर्विस प्रोवाइड को रिश्वत दी, तब कहीं जाकर मेरे प्लॉट की रजिस्ट्री हो पाई। ये आपबीती इंदौर के राहुल परमार की है।
दैनिक भास्कर मंगलवार को बता चुका है कि एमपी में बगैर रिश्वत दिए प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। सर्विस प्रोवाइडर्स के जरिए रिश्वत का ये खेल खेला जा रहा है। इसका खुलासा करने भास्कर रिपोर्टर आम आदमी बनकर प्लॉट की रजिस्ट्री कराने भोपाल और इंदौर के सर्विस प्रोवाइडरों के पास पहुंचे।
उनसे बातचीत की तो हर किसी ने रजिस्ट्रार ऑफिस के सब रजिस्ट्रार और जिला रजिस्ट्रार के लिए रिश्वत की डिमांड की। इंदौर का एक सर्विस प्रोवाइडर बोला- आप पैसा नहीं देंगे तो हम भी रजिस्ट्री नहीं करवाएंगे। हम क्यों करवाएं?
आज पढ़िए इंदौर में रजिस्ट्री के लिए कैसे ली जा रही है रिश्वत…।
सर्विस प्रोवाइडर बोले- यहां प्रति लाख के हिसाब लिया जाता है कमीशन
इंदौर में भास्कर की टीम ने आधा दर्जन से ज्यादा सर्विस प्रोवाइडरों से संपर्क किया यहां लिंबोदी में एक हजार स्क्वायर फीट के प्लॉट की रजिस्ट्री की इनक्वायरी की तो पता चला कि यहां प्रति लाख पर कमीशन लिया जाता है। यहां भी हर सर्विस प्रोवाइडर बोला कि कमीशन के अलावा रिश्वत नहीं देंगे तो अधिकारी रजिस्ट्री ही नहीं करेंगे।
पढ़िए सर्विस प्रोवाइडर्स ने किस तरह रिश्वत के इस पूरे सिस्टम का खुलासा किया…

रिपोर्टर: श्रीकृष्ण प्रीमियम कॉरिडोर, लिंबोदागारी में एक हजार स्क्वायर फीट के प्लॉट की रजिस्ट्री करानी है?
कपिल: स्टाम्प ड्यूटी के साथ 5000 हमारा शुल्क लगेगा।
रिपोर्टर: पेमेंट थोड़ा ज्यादा है इसमें कोई गुंजाइश हो सकती है?
कपिल: आप डॉक्यूमेंट लेकर आ जाओ, 500 कम कर देंगे। इससे ज्यादा कोई गुंजाइश नहीं है। 3500 रुपए तो पंजीयन विभाग में देने पड़ते हैं।
रिपोर्टर: ऑफिस के अंदर की रेट किस हिसाब से तय होती है।
कपिल: आप भोपाल से आए हैं, यहां भोपाल से अलग खेल है। वहां 0.2 प्रतिशत रेट चलता है तो यहां प्रति लाख के हिसाब से रिश्वत देना पड़ती है। जैसे 10 लाख से कम की अगर रजिस्ट्री है तो कम से कम 3000 से 3500 देने पड़ेंगे। जैसे-जैसे रजिस्ट्री की वैल्यू बढ़ेगी, पेमेंट बढ़ जाता है। अगर पेमेंट नहीं देंगे अंदर तो रजिस्ट्री में कुछ कमी निकाल दी जाएगी, टाइम पर काम नहीं होगा।

रिपोर्टर: वंदना नगर में एक फ्लैट की रजिस्ट्री करानी है?
प्रीतम: कल ही रजिस्ट्री करा दूंगा। स्टाम्प शुल्क के अलावा 5000 रुपए लगेंगे। विभाग में 3500 हजार का रेट है।
रिपोर्टर: जब हमारे प्लॉट के सारे डॉक्यूमेंट सही है तो हमें रिश्वत देने की क्या जरूरत है?
प्रीतम: अगर आप पेमेंट नहीं दोगे तो हम भी रजिस्ट्री नहीं करेंगे। क्योंकि कोई आदमी कुछ पेमेंट ही नहीं दे रहा है तो हम रजिस्ट्री क्यों करेंगे।
रिपोर्टर: सर्विस प्रोवाइडर का कमीशन तो हम दे रहे हैं, लेकिन अंदर का पेमेंट नहीं देंगे।
प्रीतम: अधिकारी हमसे जुड़ा हुआ है अगर आप हमें पैसा नहीं दोगे तो वह पैसा अधिकारी के पास नहीं पहुंचेगा। वे बोलेंगे कि तुम बिना पैसे यह फाइल लाए ही क्यों? पहले बोलते तो हम इस प्लॉट में बहुत सारी कमियां निकालते, ताकि जिंदगीभर वह रजिस्ट्री कराने के लिए भटकता रहे। आप और हम लोग कुछ नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कलम तो इन लोगों के हाथ में है। यह प्लॉट में किसी भी प्रकार की कोई कमी निकाल सकते हैं अगर ज्यादा करते हैं तो रेट भी डबल कर देते हैं कुछ कमी निकालकर, शासन में बैठे लोगों को इतनी चिंता नहीं होती है।

रिपोर्टर: वंदना नगर में एक फ्लैट की रजिस्ट्री करवाना है? रेट 25 लाख का रहेगा?
नितिन: स्टाम्प ड्यूटी के अलावा 8000 हजार रुपए लगेंगे।
रिपोर्टर: दूसरे सर्विस प्रोवाइडर तो इतना चार्ज नहीं ले रहे?
नितिन: मैंने तो आपको सबसे कम चार्ज बताया, इंदौर में इससे कम रेट पर कोई रजिस्ट्री नहीं करेगा। बड़े सर्विस प्रोवाइडर तो 3 से 5 हजार खुद की फीस ले लेते हैं।
रिपोर्टर: आप भी तो 8 हजार मांग रहे हैं?
नितिन: ये सारा पैसा मेरी जेब में तो नहीं जाएगा। मुझे तो ढाई-तीन हजार मिलेंगे। पांच से साढ़े पांच हजार तो सब रजिस्ट्रार और अन्य कर्मचारियों में बंट जाएगा। इसमें रजिस्ट्री की फोटो खींचने वाले और ऑफिस के क्लर्क भी शामिल हैं।
रिपोर्टर: हर रजिस्ट्री पर कमीशन फिक्स होता है क्या?
नितिन: हमें तो सभी रजिस्ट्री में रजिस्ट्री ऑफिस के अंदर पेमेंट देना पड़ता है। ये 10 रजिस्ट्री देखिए, इनमें भी हमने चार से 5000 रुपए अंदर दिए हैं। अगर छोटा होम लोन या मोरगेज लोन के डॉक्यूमेंट भी लेकर जाते हैं तो अधिकारी 500 से 700 रुपए चार्ज ले लेते हैं। हम अपने घर की रजिस्ट्री भी कराएंगे तो ये अधिकारी हमें भी बिना रिश्वत लिए नहीं छोड़ेंगे। सरकार ने रजिस्ट्री का सारा सिस्टम तो ऑनलाइन कर रखा है, लेकिन इतनी ट्रांसपेरेंसी होने के बाद भी रिश्वत का खेल बंद नहीं हो रहा। हालांकि, अब ये दलाली 30 प्रतिशत ही बची है। पहले तो जमकर करप्शन होता था।
रिपोर्टर: यदि रिश्वत नहीं देंगे तो क्या रजिस्ट्री नहीं कराओगे?
नितिन: अंदर के लोग बंधे हुए होते हैं हमें तो रोजाना का काम पड़ता है। हमें कस्टमर को जल्दी रजिस्ट्री देनी होती है इसलिए पेमेंट देना पड़ता है। अगर पेमेंट नहीं देते हैं तो डॉक्यूमेंट को लटका कर रख लेते हैं। हमारे लिए तो मजबूरी है। अगर मैं अपने घर की रजिस्ट्री कराऊं तो भी रजिस्ट्री ऑफिस के अंदर पेमेंट देना पड़ेगी। अगर हम पेमेंट नहीं देंगे तो हमसे कुछ और काम निकलवा लेंगे, लेकिन हमें पेमेंट तो देना ही पड़ेगा। आजकल आदमी सुविधाओं के लिए पैसा खर्च करता है।

रिपोर्टर: प्लॉट की रजिस्ट्री करवाना है, कुल खर्च कितना आएगा?
अली: पांच हजार रुपए हमारा खर्च होगा, इसमें तीन हजार रुपए रजिस्ट्रार के अधिकारी और बाबू का शुल्क होगा। अधिकारी सीधे तो पैसे लेते नहीं है, बाबू के जरिए उन तक पैसे पहुंचाते हैं।
रिपोर्टर: अधिकारी कितने लेता है और बाबू कितने लेते हैं?
अली: हम रजिस्ट्रार के बाबू को ही पूरा पैसा दे देते हैं, सभी लोग उन्हीं को पैसे देते हैं। मैं जब से इस फील्ड में आया हूं, जब से देख रहा हूं कोई रजिस्ट्री बिना पैसे दिए नहीं करते अधिकारी। अफसर भी तो रिश्वत देकर इंदौर जैसे शहर में बैठा है, पैसा तो कमाएगा।

रिपोर्टर: फ्लैट की रिजस्ट्री का कुल कितना शुल्क लगेगा।
जुनैद: 5 से 6 हजार रुपए लगेंगे, फाइनल शुल्क भैया बताएंगे।
रिपोर्टर: पुरानी मल्टी है, सभी अनुमति भी है, फिर भी शुल्क लगेगा?
जुनैद: इस राशि में हमारे चार्ज के साथ रजिस्ट्रार ऑफिस का शुल्क भी शामिल है। आपको कहीं परेशान नहीं होना पड़ेगा। मल्टी पुरानी है तो क्या, सौ साल पुरानी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए भी पंजीयन ऑफिस में शुल्क देना ही पड़ता है।


इंदौर के रजिस्ट्रार दफ्तर में दो अफसर 9 साल से जमे, कई ट्रांसफर होकर वापस लौटे
राजधानी भोपाल की तरह इंदौर में भी कई अफसर रजिस्ट्रार दफ्तर में कई सालों से जमे हैं। उप पंजीयक ज्योति रावत और राजेश कछावा यहां 2015 से पदस्थ है। वहीं विवेक हिरदे आठ साल से तो तीन वरिष्ठ उप पंजीयक प्रशांत पाराशर, प्रदीप सोरते और नीता तंवर की पदस्थापना को 7 साल हो चुके हैं। जबकि नियम है कि तीन साल बाद अधिकारी का ट्रांसफर हो जाता है। दूसरी तरफ ऐसे कई अफसर है जिनकी दोबारा यहां पोस्टिंग हुई है।


अफसर बोले- सर्विस प्रोवाइडर ज्यादा शुल्क ले रहे हैं तो शिकायत करें
भोपाल की तरह इंदौर के अफसरों ने भी कहा कि यदि कोई सर्विस प्रोवाइडर तय शुल्क से ज्यादा शुल्क ले रहा है, तो इसकी शिकायत आम लोगों को करना चाहिए। इस शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी। रजिस्ट्रार दफ्तर के अधिकारियों ने ये भी कहा कि उनके नाम पर सर्विस प्रोवाइडर ज्यादा शुल्क ले रहे हैं, तो ये गलत है।
पंजीयन विभाग के डीआईजी बी के मोरे ने कहा कि आज तक आम जनता की तरफ से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली। यदि कोई ऐसा कर रहा है तो जिला पंजीयक को उसके खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए।


भास्कर की खबर के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरा
दैनिक भास्कर के ‘रजिस्ट्री में रिश्वत स्टिंग’ के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार को घेरते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा – 40% कमीशन का जाल, नए मुख्यमंत्री के राज में भी बरकरार । वहीं, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया एडवाइजर केके मिश्रा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म x पर पोस्ट कर लिखा- भीषणतम गर्मी से अधिक समूचा प्रदेश ‘भ्रष्टाचार’ के चपेट में आमजन हलाकान।

दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला किया।

पीसीसी चीफ के मीडिया प्रभारी के के मिश्रा ने भी इस मामले को लेकर सरकार को घेरा
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आप प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने सरकार के पंजीयन कार्यालय जाएंगे तो आपको 5 से 7 हजार रुपए रिश्वत के देने ही पड़ेंगे, भले ही आपके पास सभी लीगल डॉक्यूमेंट क्यों न हों। पंजीयन कार्यालयों में रिश्वत का यह लेन-देन बाकायदा एक सिस्टम से होता है- सर्विस प्रोवाइडर के जरिए। दैनिक भास्कर के स्टिंग में सर्विस प्रोवाइडर्स ने कबूला है कि ये रुपए वे सब रजिस्ट्रार, डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार और ऊपर तक पहुंचाते हैं। पढ़िए पूरी खबर
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