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बिहारी ‘बाबू’ के जान के पीछे पड़े खालिस्तानी, रखा है ₹3.5 करोड़ का इनाम, ट्रूडो को यह कांड क्यों नहीं दिखा?

नई दिल्ली: खालिस्तान प्रेम में डूबे जस्टिन ट्रूडो ने भारत और कनाडा के रिश्तों की लंका लगा दी है. खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को मुद्दा बनाकर जस्टिन ट्रूडो कनाडा चुनाव जीतना चाहते हैं. खालिस्तानियों को खुश करने के लिए वह भारत को बदनाम कर रहे हैं. कनाडा ने निज्जर की हत्या में भारतीय राजनियक के शामिल होने का आरोप लगाया है. कनाडा भारतीय उच्चायुक्त संजय वर्मा से पूछताछ करना चाहता था. मगर भारत ने उसके आरोपों को बेतुका बताकर उसके सभी आरोपों को खारिज कर दिया. कनाडा और खालिस्तानियों की मंशा समझते ही भारत ने आनन-फानन में अपने उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा समेत अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया. माना जा रहा है कि संजय कुमार वर्मा समेत भारतीय राजनयिक सीक्रेट तरीके से और अलग-अलग उड़ानों से शनिवार तक भारत आ जाएंगे.

सूत्रों का दावा है कि कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को खालिस्तानियों से जान का खतरा था. कनाडा उनसे पूछताछ करना चाहती थी. जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या मामले में भारतीय उच्चायुक्त और राजनायिक संजय कुमार वर्मा को ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ यानी संदिग्ध बताया है. कनाडा उन्हें निशाना बनाने की कोशिश में था. भारत सरकार का कहना है कि कनाडा में उग्रवाद और हिंसा के माहौल में ट्रूडो सरकार के एक्शन्स ने उनकी सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. यही वजह है कि संजय कुमार वर्मा समेत अन्य राजनयिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने उन्हें बुलाना का फैसला लिया है.

खालिस्तानियों ने संजय वर्मा पर रखा इनाम
कनाडा में उनकी सुरक्षा को खतरा था. इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि उनके पीछे खालिस्तानी हाथ धोकर पड़ गए थे. खालिस्तानियों ने तो यहां तक संजय कुमार वर्मा पर इनाम भी रख दिया है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर संजय वर्मा पर खालिस्तानियों ने पचास लाख कनाडाई डॉलर का इनाम रखा है. भारतीय करेंसी में यह करीब साढ़े तीन करोड़ (30498535) रुपए होती है. पिछले शनिवार को खालिस्तानियों ने वैंकूवर में संजय वर्मा का पुतला फूंका गया था और उस पर गोलियां चलाई थी. उसके बाद संजय वर्मा पर इस इनाम का ऐलान किया.

खालिस्तान पर प्यार बरसा रहे ट्रूडो
खालिस्तानी आतंकी की हत्या हो गई तो जस्टिन ट्रूडो बेकार में हायतौबा किए हुए हैं. बगैर सबूत के भारत पर आरोप मढ़ रहे हैं. मगर उनके अपने ही घर में भारत के राजनयिक के लिए खालिस्तानी आतंकी इनाम की घोषणा करते हैं तब भी वह हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं. ट्रूडो सरकार न केवल खालिस्तानियों को पाल-पोस रही है, बल्कि अब उसे खुली छूट दे दी है. यही वजह है कि सरेआम संजय वर्मा का पुतला फूंका गया और उस पर गोली चलाई गई. ट्रूडो अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए सारे तिकड़म अपना रहे हैं.

कौन हैं बिहार के लाल संजय वर्मा
अब जानते हैं कि आखिर संजय वर्मा कौन हैं? संजय वर्मा अब तक कनाडा में उच्चायुक्त हैं, मगर वह शनिवार तक भारत आ जाएंगे. संजय वर्मा का जन्म बिहार में हुआ है. वह साल 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं. 28 जुलाई, 1965 को जन्मे वर्मा ने पटना विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन की पढ़ाई की. इसके बाद आईआईटी दिल्ली से फिजिक्स में पोस्ट ग्रैजुएशन किया. उनका तीन दशकों से भी लंबा शानदार राजनयिक करियर रहा है.

Tags: Canada, Canada News, Khalistani terrorist, World news


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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