Farmers’ indefinite strike continues | अतिवृष्टि और बारिश से खराब हुई फसलों का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग

बड़वानी28 मिनट पहले
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गत दिनों में जो असमय भयंकर बारिश होने से किसानों की फसलें तो पूरी तरह चौपट हुई, लेकिन मां नर्मदा किनारे बसे गांव में नर्मदा बैक वाटर की वजह से किनारे के गांव जलमग्न हो गए थे। इसको लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ बड़वानी जिलें में किसानों की समस्याओं को लेकर ग्राम सजवानी, घटटी, नंदगांव, लोनसरा, चितावल, ब्रह्मंगाव, सहित जिले में लगभग 51 गांवों में कार्यालय समय पर अनिश्चित कालीन धरना आंदोलन कर रहा है।
शुक्रवार को ग्राम सजवानी में किसानों ने कृषि मंत्री कमल पटेल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही कृषि मंत्री का पुतला दहन किया किसानों में काफी आक्रोश था किसान विनोद सेप्टा ने बताया कि सब किसान मिलकर ऐसे धरना आंदोलन जब तक करते रहेंगे। जब तक शासन प्रशासन द्वारा धरना आंदोलन में किसानों की बात नही सुनी जाएगी।
उन्होंने बताया कि अतिवृष्टि बारिश से किसानों के खेतो में खराब हुई फसल का सर्वे करवाकर मुआवजा राशि दिए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। आज धरना स्थल सजवानी में किसानों ने मांगों को लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का पुतला जलाया। किसानों का कहना है कि अतिवृष्टि बारिश से किसानों की 100 प्रतिशत तक फसल खराब हुई है लेकिन आज तक न तो अधिकारी आए है न ही कोई नेता आए है।
हमारी मांग है कि प्रत्येक किसना के खेत का सर्वे करवाकर 40 हजार रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाए। जिससे किसान अपने बच्चे की फीस परिवार के बीमारी सदस्य के इलाज में खर्च होने वाली राशि का वहन कर सके। आज मांगों को लेकर कृषि मंत्री का पुतला जलाया है। जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं होती है। किसानों का धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। अगर शासन प्रशासन ने किसानों की बात नहीं सुनी तो आगामी मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। जिसकी जवाबदारी शासन प्रशासन की रहेगी।

किसान खेमराज पाटीदार ने बताया कि एमएसपी गारंटी कानून लागू करो
संपूर्ण किसानों को ऋण मुक्त किया जाए। मंडियों कपास एसपी कानून के तहत लिया जाए। सीसीआई के द्वारा और अत्यधिक बारिश से जिले में किसानों की फसलें जो चौपट हो गई है। उनको 40000 पर एकड़ मुआवजा दे। सर्वे की कोई जरूरत नहीं तत्काल किसानों के बैंक अकाउंट में जमा किया जाए।
संघ के जिलाध्यक्ष मदन मुलेवा ने बताया कि नर्मदा में आई तबाही का मंजर यह था कि उसे बयां नहीं किया जा सकता। दुख की घड़ी इस प्रकार है कि आंखों से आंसू नहीं टपक रहे हैं। किसानों के सारे अरमान टूट गए हैं। कुल मिलाकर यह लापरवाही से हुआ है। इसमें सभी दोषी है शासन तो है ही है, लेकिन प्रशासन मूल रूप से दोषी है l अगर समय रहते नर्मदा का पानी निकासी किया जाता तो आज इतने गांव जलमग्न नहीं होते।
नर्मदा की बाढ़ से कई पशु की जनहानि हुई, तो पशुओं के लिए जो चारा रखा हुआ था वह खत्म हो गया है। अगली बोवनी के लिए जो घर में बीज रखे थे वह भी खत्म हो गए। ग्राम बड़दा में एक ही घर से दो जनहानि हुई। इन सब का दोषी कौन? राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ शासन प्रशासन से मांग करता है कि प्रभावित किसानों को मुआवजा मिले और जिनके यहां जनहानि हुई और पशु हानि हुई सभी किसानों को मुआवजा दें नही तो लगातार गांव स्तर पर कार्यालय समय अनिश्चित कालीन धरना गांधीवादी तरीके से चलता रहेगा l








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