राष्ट्रकवि मैथिलिशरण गुप्त को किया गया याद

छतरपुर। बीते रोज राष्ट्रकवि मैथिलिशरण गुप्त की जयंती पर हम फाउण्डेशन के तत्वाधान में बेविनार का आयोजन किया गया। जिसमें सभी सदस्यों ने राष्ट्रकवि मैथिलिशरण गुप्त को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के शुभारंभ में हम फाउण्डेशन के जिलाध्यक्ष प्रवीण गुप्त ने कहा कि दद्दा ने खड़ी बोली को शीर्ष पर स्थापित किया था। देश प्रेम की भावना उनमें कूट-कूटकर भरी हुई थी तथा वे सर्वधर्म समभाव के पक्ष में रहते थे।

उन्होंने लिखा था- जाति धर्म या संप्रदाय का नहीं भेद व्यवधान यहां, सबका स्वागत-सबका आदर, सबका सम सम्मान यहां। राम-रहीम बुद्ध ईशा का सुलभ एक सा ध्यान यहां, भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों के गुण गौरव का ज्ञान यहां, नहीं चाहिए बुद्धि बैर की भला प्रेम उन्माद यहां। सबका शिव कल्याण यहां है, पावें सभी प्रसाद यहां।प्रांत उपाध्यक्ष कोमल टिकरया ने कहा कि राष्ट्रकवि गुप्त जी ने नारी के उत्थान के लिए भरसक प्रयत्न किए और उन्होंने अपनी रचनाओं में महिला उपेक्षित पात्रों को प्रमुख स्थान दिया, जैसे कैकयी, हिडिम्बा, यशोधरा, उर्मिला आदि। हम फाउण्डेशन के सदस्य एवं केयर इंग्लिश स्कूल के डायरेक्टर मनीष दोसाज ने कहा गुप्त जी की भारत भारती एक ऐसी रचना है जिसमें भारत की विभिन्न धर्म, जाति, संप्रदाय की संस्कृति के दर्शन होते हैं। आभार ज्ञापन आनंद अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर हम फाउण्डेशन के अरुण राय, विवेक रावत, मुकेश चौबे, मुकेश सोनी, इनरव्हील अध्यक्ष ज्योति चौबे, किरन गुप्ता, किरन बृजपुरिया, अर्चना कठल, प्रभा बरसैंया, अंशुल चौरसिया, अनुज टिकरया, डॉ. निधि रूसिया, जयदीप बृजपुरिया, निरंकार चौरसिया, मयंक महरोत्रा, रवि गुप्ता, आयकर अधिवक्ता संतोष गुप्ता सहित अनेकों लोगों ने गुप्त जी पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।