अजब गजब

9 साल की कॉरपोरेट नौकरी छोड़ बाइक टैक्सी चालक बनी हर्षिका, अपने काम पर है गर्व

नई दिल्ली. अक्सर देखने को मिलता है कि जब महिला सशक्तिकरण की चर्चा होती है, तब हमारे जेहन में उन सफल महिलाओं की तस्वीरें उभरती हैं, जो या तो किसी बड़ी कंपनी की सीईओ हैं या कोई बड़ी सामाजिक कार्यकर्ता या फिर कोई सेलिब्रेटी. लेकिन समाज में कई ऐसी महिलाएं हैं जो पुराने ढर्रे से हटकर दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हैं. महिला दिवस (Women’s day 2020) के मौके पर हम एक ऐसी महिला की कहानी बयां कर रहे हैं, जिन्होंने पुरुष प्रधान समाज की तमाम बंदिशों को चुनौती देते हुए अपनी राह खुद बनाई.

महिलाओं की ड्राइविंग क्षमता को कम आंका जाता है. लेकिन सूरत की रहने वाली हर्षिका पांड्या ने लोगों की इस मानसिकता को बदलने का काम किया है. गुजरात के सूरत की रहने वाली हर्षिका पांड्या का संघर्ष भी आम महिलाओं से अलग नहीं है. आइए मिलते हैं सूरत की 37 वर्षीय उस महिला से जिसने भारत के बाइक टैक्सी सेगमेंट में महिलाओं के लिए रास्ता बनाया.

सूरत की एकमात्र महिला बाइक चालक
37 वर्षीय हर्षिका पांड्या पढ़ने में भी अव्वल हैं. उन्होंने पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ले रखी है. कुछ महीने पहले ही हर्षिका, दुनिया के सबसे बड़ी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म ओला से जुड़ी हैं. इसके पहले, वो एनजे फाइनेंस में काम करती थीं. हर्षिका ने जब एक आंत्रप्नयोर बनने का निर्णय किया तो उन्होंने 9 साल की अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ दी और यात्रा करने के अपने सपनों को पूरा करने में जुट गईं.

जब हर्षिका को पता चला कि ओला अपनी बाइक कैटेगरी के लिए ड्राइवर पार्टनर्स की नियुक्ति कर रही है तो उन्होंने बाइक चालक की नौकरी में एक बार हाथ आजमाने की सोची. क्योंकि वह बाइक चलाने में सहज थीं. कंपनी से जुड़ने के कुछ दिनों के भीतर, उन्हें न सिर्फ आत्मविश्वास मिला बल्कि वो सम्मान और पहचान पाकर कृतज्ञ भी हुईं.

घर में एकमात्र कमाने वाली नहीं हैं हर्षिका
हर्षिका अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहती हैं. उनके परिवारवाले बेहद सपोर्टिव हैं और उन्होंने उनके ओला बाइक चालक बनने के फैसले को प्रोस्ताहित किया. वो घर में एकमात्र कमाने वाली नहीं हैं. वो अपने परिवार को सपोर्ट करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने में सक्षम होने के कारण हर्षिका को अपने आप पर गर्व के साथ-साथ अपने मनोबल को बढ़ाने में मदद मिलती है.

अपने काम से मिलता है आत्मविश्वास
हर्षिका कहती हैं, “बाइक ड्राइवर पार्टनर होने के नाते मुझे वित्तीय रूप से स्वतंत्र होकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का आत्मविश्वास देता है. ओला के साथ, न सिर्फ मेरी कमाई बढ़ी है, बल्कि मैं गरिमा के साथ काम करने और अपने काम का समय चुनने में भी सक्षम हूं.” फ्लेक्जेबल शेड्यूल होने की वजह वो एक दिन में 8 से 9 राइड पूरी कर लेती हैं, जिससे अपने अन्य काम को करने और अपने परिवार की देखभाल करने का समय मिलता है. उनके अधिकांश ग्राहक छात्र होने के साथ, उन्हें गर्व है कि उनका परिवार बाइक पर उनके साथ ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं और उनके साहसिक प्रयासों की सराहना भी करते हैं. यह उन्हें और अधिक करते रहने के लिए प्रेरित करता है.

अन्य महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बनाने में सक्षम
हर्षिका को उम्मीद है कि उसकी कहानी कमाई करने वाली महिलाओं को इस तरह के फैसले लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी. “ओला न केवल हमें आवश्यक ट्रेनिंग देती है जो हमें पेशेवर रूप से मदद करती है, बल्कि इसकी तकनीक भी हमें सुरक्षित रखती है इसलिए समय कभी भी समस्या नहीं बनती.” मैं ओला की आभारी हूं कि उसने मुझे अन्य महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बनाने में सक्षम बनाया और उन्हें दिखाया कि अगर वे कुछ करने की ठान लें तो वे कुछ भी हासिल कर सकती हैं.

Tags: Business news in hindi, Gujarat, Ola ride, Success Story, Surat, Women


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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