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Opinion: बाबा साहेब अंबेडकर की विरासत को पुनर्जीवित करने की मुहिम में जुटे हैं पीएम मोदी

14 अप्रैल को बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती पूरा देश धूमधाम से मनाता है. 2020 में पीएम मोदी की सरकार ने ही डॉ. अंबेडकर के जन्मदिन को केन्द्र सरकार के सभी कार्यालयों में सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया था. पीएम मोदी खुद असम में हैं. गुवाहाटी एम्स को राष्ट्र को समर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जनता के लिए सेवा भाव से काम कर रही है. राष्ट्र सर्वोपरी और जनता प्रथम ही उनकी सरकार का एजेंडा है. मोदी सरकार के जन कल्याण कार्यक्रमों में देश के हर व्यक्ति को समान अधिकार और समान मौके देने के डॉ. अंबेडकर के सपने को ही पूरा किया जा रहा है. 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी ने भी बाबा साहेब की विरासत और आजाद भारत को लेकर देखे गए उनके सपनों को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

पीएम मोदी की पहल पर ही उनकी सरकार ने बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन से जुड़े पांच महत्वपूर्ण स्थानों को तीर्थ स्थल के रुप में विकसित गया है. मोदी सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे जलजीवन मिशन, मुफ्त आवास, मुफ्त बिजली, कोरोना के दौरान जन कल्याण और महिला सशक्तिकरण के लिए की गयी पहल में भी साफ नजर आता है कि मकसद डॉ. अंबेडकर के सपने को आगे बढाना है. डॉ. अंबेडकर का मानना था कि ज्ञान, आत्मसम्मान और विनम्रता शिक्षा के अभिन्न अंग होने चाहिए. नई शिक्षा नीति 2020 में इन्हीं बातों पर जोर दिया जा रहा है.

डॉ. अंबेडकर को सबसे ज्यादा सम्मान देने वाली बनी है मोदी सरकार
पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने आजादी के बाद डॉ. अंबेडकर को सबसे ज्यादा सम्मान दिया है. 14 अप्रैल 2016 को नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने डॉ. अंबेडकर के जन्मस्थान का दौरा किया है. डॉ. अंबेडकर का जन्म मऊ के काली पलटन इलाके में 14 अप्रैल 1891 में हुआ था. पीएम मोदी उनकी 125वीं जयंती के मौके पर पहुंचे थे. मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार ने भी अप्रैल 2008 को दलितों के मसीहा के 117वें जन्मदिन पर एक स्मारक बनाया था. 2018 में पीएम मोदी ने दिल्ली में अंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन किया था. 2017 में पीएम मोदी ने 15 जनपथ, दिल्ली में डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक-आर्थिक ट्रांसफॉर्मेशन की शुरुआत की.

मोदी सरकार ने ही बाबा साहेब से जुड़े 5 स्थानों को पंचतीर्थ के रुप में विकसित करने की शुरुआत की. इनमें शामिल हैं, नागपुर में दीक्षा भूमि, लंदन में अंबेडकर मेमोरियल होम, अलीपुर रोड दिल्ली में उनकी महापरिनिर्वाण की जगह, मुंबई की चैत्य भूमि और दिल्ली के अलीपुर रोड जहां उन्होंने अपना आखिरी कुछ वक्त बिताया. बीजेपी सरकार की पूरी कवायद यही है कि जिसे कांग्रेस ने नकार दिया, उस दलित मसीहा की विरासत पर वो अपना हक जता सकें. डॉ. अंबेडकर का सपना था कि देश के सभी दूर दराज और समाज से कटे गांवों तक बिजली पहुंचे. पीएम मोदी ने इस दिशा मे कदम बढाया और 2018 में ही ऐलान कर दिया था कि सभी गांवों में बिजली देने का काम पूरा किया जाएगा. साथ ही पिछले 4 सालों में संविधान के निर्माता को सच्ची श्रद्धांजली देते हुए 100 से ज्यादा रिसर्च कर रहे छात्रों को लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी भेजा गया है, जहां बाबा साहेब अंबेडकर पढ़े थे.

मोदी सरकार ने दी दलितों को नई पहचान
पीएम मोदी ने सत्ता संभालने के बाद सबसे पहले राष्ट्रपति के रुप में रामनाथ कोविंद को चुना. एक दलित नेता और उनके बाद द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रपति बनना ये साबित करता है कि समाज के पिछड़े वर्गों से आने वाले लोगों को मोदी सरकार ने कितना सम्मान दिया है. यही डॉ. अंबेडकर का सपना भी था हर व्यक्ति को समान मौका मिले. पीएम मोदी ने भी अपना एक ही एजेंडा बनाया है और वो है लास्ट माईल डिलिवरी. अपने दूसरे कार्यकाल में पीएम मोदी ने अपने मंत्री मंडल में हर समुदाय को जगह देने की कोशिश की और 130 करोड लोगों की अकांक्षाओं का ख्याल रखा. मोदी कैबिनेट में अभी 12 अनुसूचित जाति के मंत्री है, जिनमें दो कैबिनेट मंत्री हैं, ये सभी मंत्री देश भर से अनुसूचित जातियों के विभिन्न समुदायों से आते हैं. इसके अलावे मंत्रीमंडल में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से भी हैं.

कांग्रेस ने डॉ. अंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया
दरअसल, आजादी के बाद कांग्रेस ने संविधान के निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया था. बीजेपी का आरोप है कि केन्द्र में कांग्रेस की सरकारों ने बाबा साहेब अंबेडकर की विरासत को जनता के मानस पटल से मिटाने की पूरी कोशिश की. पीएम मोदी ने अपने भाषणों में कई बार कहा है कि ये दुखद है कि जब तक डॉ. अंबेडकर जीवित थे और तब तक कांग्रेस सत्ता में थी, उन्हें कोई सम्मान नहीं दिया. ये दुखद है कि उनकी मृत्यु के 4 दशकों के बाद उन्हें भारत रत्न मिला. दलितों के हक और समाज में बराबरी से जीने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगाने वाले डॉ. अंबेडकर को भारत रत्न आखिरकार 1990 में वीपी सिंह सरकार ने दिया था.

पंडित नेहरु ने डॉ. अंबेडकर को कैबिनेट से निकाला था
ये बात और है कि कांग्रेस हमेशा ये दावा करती रही है कि वो डॉ. अंबेडकर के बताए रास्ते पर चल रही है. बीजेपी का आरोप है कि ये सच्चाई से परे है. 10 अक्टूबर 1951 को डॉ. अंबेडकर ने नेहरु कैबिनेट से इस्तीफे के सही कारणों पर संसद में ही भाषण दिया था. जानकारों का मानना है कि डॉ. अंबेडकर का ये भाषण पंडित नेहरु की उस लोकतांत्रिक छवि को तार तार करता है, जिसके मुताबिक वो बहस और विरोध दोनों पर विश्वास रखते थे. अपने भाषण में डॉ. अंबेडकर ने पंडित नेहरु की योग्यता पर ही सवाल उठाए थे. उन पर आरोप लगाया था कि वो झूठ बोलते थे और अपने सहयोगियों को धोखा देते थे. आजादी के बाद हुए दोनों लोकसभा चुनावों मे कांग्रेस ने बाबा साहेब को नीचा दिखाया. पहले लोकसभा चुनावों के ठीक पहले बाबा साहेब अंबेडकर ने अनुसूचित जाति फेडरेशन बनाया था, जो बाद में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया बना. लेकिन डॉ. अंबेडकर बंबई की आरक्षित सीट से हार गए थे. उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार एनएस काजरोलकर ने हराया था. डॉ. अंबेडकर बंबई से राज्यसभा पहुंचने में सफल हुए थे, लेकिन 1954 में भंडारा से हुए लोकसभा के उपचुनावों में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा था.

मार्ग से भटकीं दलित की राजनीति करने वाली पार्टियां
बाबा साहेब के नाम पर दलित राजनीति करने वाली पार्टियां भी मार्ग से भटकती और सिमटती चलीं गईं. बाबा साहेब कि विरासत पर हक को लेकर ये सभी छोटे बड़े दल भिड़े हुए थे. ऐसे में पीएम मोदी की सरकार ने राष्ट्र निर्माण का अपना जो विजन लेकर चल रही है, उससे तो साफ हो गया है कि दलितों के मसीहा की विरासत संजोने का हक सिर्फ उनका ही है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)

Tags: Baba Saheb Ambedkar Jayanti, BJP, Narendra modi, Opinion


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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