Pratapgarh Election 2023: प्रतापगढ़ सीट में 41 साल बाद BJP ने लगायी थी सेंध, CPM का किला ढहाया, फिर चुनावी दंगल में उतरेंगे ये दिग्गज

हाइलाइट्स
CPM ने 1977 से 2013 तक के 9 चुनावों में दर्ज की थी जीत
आईपीएफटी-BJP गठबंधन के चलते सीपीएम को मिली शिकस्त
इस बार CPM-कांग्रेस मिलकर लड़ रहे चुनाव
प्रतापगढ़. त्रिपुरा राज्य (Tripura) की प्रतापगढ़ विधानसभा सीट (Pratapgarh Assembly Seat) अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अहम मानी जाती है. इस सीट पर हमेशा से मुकाबला सीपीएम के साथ रहता है. साल 1972 से सीपीएम (CPM)9 चुनाव जीत चुकी है. लेकिन 2018 के चुनावों में भाजपा ने सेंध लगाते हुए सीपीएम से इस सीट को झटक लिया था. भाजपा के रेबती मोहन दास (REBATI MOHAN DAS) ने 41 सालों से लगातार चुनाव जीत रही सीपीएम को सत्ता से बाहर कर दिया था. बीजेपी के रेबती मोहन दास ने सीपीएम के रामू दास (RAMU DAS) को 3,148 मतों के अंतराल से शिकस्त देकर जीत दर्ज की थी. इस बार भाजपा और सीपीएम दोनों ने ही अपने पुराने चेहरों पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है. राज्य की सभी 60 सीटों पर चुनाव एक चरण में 16 फरवरी को होंगे और परिणाम 2 मार्च को आएंगे.
प्रतापगढ़ विधानसभा सीट (Pratapgarh Assembly Seat) पर साल 2018 के चुनावी मुकाबले में भाजपा के रेबती मोहन दास को 25,834 वोट यानी 51.53% मत हासिल हुए थे जबकि सीपीएम के रामू दास को 22,686 मत यानी 45.25% वोट प्राप्त हुए थे. दोनों के बीच जीत हार का अंतराल 3,148 वोटों का रहा था. तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के अर्जुन दास (ARJUN DAS) को मात्र 628 वोट हासिल हुए थे. इस बार यहां से सीपीएम-कांग्रेस और भाजपा- आईपीएफटी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं.
इस सीट से भाजपा ने गठबंधन के रूप में रेबती मोहन दास (REBATI MOHAN DAS) को फिर चुनावी दंगल में उतारा है. सीपीएम ने रामू दास (RAMU DAS) पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा है. तृणमूल कांग्रेस ने कुहेली दास (KUHELI DAS) और निर्दलीय प्रत्याशी अशोक कुमार दास ( ASHOK KUMAR DAS) को चुनावी दंगल में उतरा है.
साल 2013 के चुनावों में प्रतापगढ़ एससी विधानसभा सीट पर मुकाबला सीपीएम और कांग्रेस के बीच रहा था. सीपीएम के अनिल सरकार (Anil Sarkar) ने कांग्रेस के रंजीत कुमार दास को 2,132 वोटों के अंतराल से शिकस्त देकर जीत दर्ज की थी. अनिल सरकार 1977 से 2013 तक के सभी चुनावों में जीत का परचम लहराते आए हैं. सीपीएम 1972, 1977, 1983, 1988, 1993, 1998, 2003, 2008 व 2013 के चुनाव जीतती आई है. लेकिन 2018 में भाजपा ने सीपीएम के किले में बड़ी सेंध लगाकर उसको ध्वस्त कर दिया था. इस बार मुकाबला फिर कड़ा और दिलचस्प होने जा रहा है.
राज्य में 1978 के बाद से सबसे ज्यादा राज सीपीएम का रहा
बताते चलें कि त्रिपुरा में 1978 के बाद से लेफ्ट पार्टी का ही सबसे ज्यादा कब्जा रहा है. 2018 से पहले एक बार 1988-93 के बीच भी लेफ्ट सत्ता से बाहर रही थी. बाकी सभी विधानसभा चुनावों में लेफ्ट ने अपना वर्चस्व बरकरार रखा है. 2018 में त्रिपुरा में भाजपा और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) गठबंधन को 60 सीटों में से 44 सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी के पास 36 सीटें आईं जबकि आईपीएफटी 8 सीटों पर कब्जा रहा था. दिलचस्प बात यह है कि इस गठबंधन ने प्रदेश की सभी 20 जनजातीय सुरक्षित (ST) विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी.
त्रिपुरा पश्चिमी लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा
प्रतापगढ़ विधानसभा सीट (Pratapgarh Assembly Seat) त्रिपुरा पश्चिमी लोकसभा सीट (Tripura Lok Sabha Seat) के अंतर्गत है जहां से 2019 के चुनाव में भाजपा की प्रतिमा भौव्मिक (Pratima Bhowmik) ने जीत दर्ज की थी और 573532 वोट हासिल किए थे. कांग्रेस प्रत्याशी सुबल भौव्मिक को 3 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था. लेफ्ट प्रत्याशी इस सीट पर तीसरे स्थान पर रहे थे.
राज्य के कुल वोटरों की संख्या 28.23 लाख
त्रिपुरा में 8 जिले हैं जिनमें धलाई, पश्चिम त्रिपुरा, उत्तर त्रिपुरा, दक्षिण त्रिपुरा, गोमती, खोवई, सिपाहीजाला, ऊनाकोटी प्रमुख रूप से शामिल हैं. त्रिपुरा में हिंदुओं की आबादी करीब 84 प्रतिशत है. बांग्ला यहां की मुख्य भाषा है और दुर्गा पूजा प्रमुख त्योहार है. राज्य के कुल मतदाताओं की बात करें तो यह 28,23,822 है. इसमें इस बार 10344 सर्विस वोटर भी शामिल हैं. सामान्य मतदाताओं की संख्या 28,13,478 है जिसमें 13,98,825 महिला मतदाता, दिव्यांग 17,297 और ट्रांसजेंडर वोटरों की संख्या 77 है. वहीं 18 साल के पहली बार वोटरों की संख्या 65,044 है.
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Tags: Assembly election, Tripura, Tripura Assembly Election
FIRST PUBLISHED : February 12, 2023, 16:49 IST
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