देश/विदेश

Opinion: विरोध करते रहिए, फ़िल्म तो दुनिया की कहानी कहकर कमा रही है

जो तुमको हो पसंद वही बात क्यों करे!! फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी के क्या मतलब रह जायेंगे लेकिन इस देश के बहुत सारे बौद्धिक ठेकेदारों को लगता है कि बात वही कही जाये जिसके दायरे उनके और उनकी जमात द्वारा तय किये गए हो. सवाल ये है कि जब सती प्रथा, दहेज़ प्रथा, जाति व्यवस्था, बाल विवाह जैसी तमाम कुप्रथाओं पर फ़िल्में बन चुकी है, साधू सन्यासियों को अपराधी और बलात्कारी तक दिखाया गया, तब केरला स्टोरी से किसको और क्यों दिक्कत है?

बौद्धिकता के ठेकेदार चाहें जो भी कहे लेकिन सुदीप्तो सेन के डायरेक्शन में बनी ‘द केरला स्टोरी’ को दर्शकों का प्यार लगातार मिल रहा है, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है. फिल्म ने 5 मई यानी अपने रिलीज़ के दिन 8.3 करोड़ का बिजनेस किया, अगले दिन शनिवार को 11.22 करोड़ रुपयों का कारोबार किया और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक ‘द केरला स्टोरी’ ने रविवार को 16 करोड़ का शानदार बिजनेस किया है, जिससे तीन दिनों में फिल्म अब तक 35.25 करोड़ रुपये कम चुकी है.

लड़कियों का धर्मांतरण हुआ और उन्हें सीरिया भेजा
‘द केरल स्टोरी’ केरल की उन लड़कियों की कहानी है जिन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा ब्रेन वॉश कर जिहाद के लिए इस्तेमाल किया गया था. इन लड़कियों का धर्मांतरण हुआ और उन्हें सीरिया भेजा गया. फिल्म के टीजर रिलीज होते ही विवाद शुरू हो गया और केरल को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए इसे बैन करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मांग को खारिज कर हाईकोर्ट जाने को कहा था. इसके बाद हाईकोर्ट में धड़ाधड़ 5 याचिकाएं दाखिल की गई जिसमें से एक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की भी थी.

किसी समुदाय विशेष के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं
लेकिन केरल हाईकोर्ट ने ज़बरदस्त फैसला सुनाया. कोर्ट ने फिल्म रिलीज पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि ‘फिल्म के ट्रेलर में किसी समुदाय विशेष के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है बल्कि फिल्म में इराक और सीरिया के बारे में दिखाते हुए ISIS की कहानी दिखाई गई है. अनेक फ़िल्मों में हिंदू सन्यासी को स्मगलर और बलात्कारी के रूप में दिखाया गया, लेकिन कुछ विरोध नहीं हुआ, ऐसी कई हिन्दी और मलयालम फ़िल्में हैं.’ इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलमा-ए-हिंद की एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र और अन्य को सिनेमाघरों, ओटीटी प्लेटफार्मों और अन्य रास्ते में फिल्म की स्क्रीनिंग या रिलीज की अनुमति नहीं देने का निर्देश देने और ट्रेलर को इंटरनेट से हटाने की मांग की गई थी.

कोर्ट में नाकाम हुए तो फ़िल्म का विरोध किया और बंगाल में बैन कर दिया
कोर्ट में नाकाम होने के बाद समाज में फिल्म की स्वीकार्यता को रोकने के प्रयास होने लगे. वामपंथी तबके से जहाँ केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कहा कि फ़िल्म के ट्रेलर से ऐसा प्रतीत होता है कि इसका मक़सद राज्य के ख़िलाफ़ प्रोपेगैंडा करना और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है. तो वहीं सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद एए रहीम ने कहा है. ‘झूठ से ढकी ये फ़िल्म आरएसएस और संघ परिवार का एजेंडा है जो चुनावी फ़ायदा उठाना चाह रहे हैं.’ कांग्रेस भी कहाँ पीछे रहने वाली थी. यूथ कांग्रेस ने केरल की राजधानी कोच्चि में फ़िल्म के ख़िलाफ प्रदर्शन किया. हालाँकि कुछ वक़्त पहले खुद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक ट्वीट में लिखा था कि ‘मेरे पास केरल की कुछ माँ आई थीं, जिनकी बेटियां अफ़ग़ानिस्तान में फंसी हैं, उनके पतियों ने उन्हें बहकाया था.’ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए राज्य में ‘द केरला स्टोरी’ फिल्म पर बैन लगा दिया. बकौल ममता बनर्जी ‘यह फैसला बंगाल में अमन-चैन बनाए रखने के लिए लिया गया है. द केरला स्टोरी क्या है? यह एक मनगढ़ंत कहानी है.’

इस हाल के जिम्मेदार आप भी
सवाल ये है कि अभिव्यक्ति की आजादी के झंडाबरदार बने हुए ये लोग दिन रात ‘लोकतंत्र खतरे में है’ की रट लगते रहते हैं लेकिन केवल एक फिल्म से साबित हो गया कि ये केवल आडम्बर है. दरअसल ये सच के नाम पर ‘अपना सच’ चाहते हैं. वो सच जो इन्होने रचा हो, गढ़ा हो. इनके एजेंडे और प्रोपोगेंडा से इतर कोई और कहानी दिखाने की कोशिश भी हो तो ये तानाशाही पर उतर आते हैं. ये कश्मीर पर ‘हैदर’ के साथ सहज हैं लेकिन ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर बेचैन हो उठते हैं. ‘द केरला स्टोरी’ में दहशतगर्दों से बचकर आई लड़की अपने पिता से कहती है कि ‘मेरे इस हाल के जिम्मेदार आप भी है, आपने बचपन से हमें वेस्टर्न और अन्य बाहरी संस्कार तो दिए लेकिन कभी भी हमें अपने धर्म के बारे में नहीं सिखाया.’ ऐसे ना हो कि आने वाली पीढियां हमसे ये कहें कि ‘हमें एक ही पक्ष देखने जानने और सुनने को मिला, दूसरी कहानी कभी सुनने को मिली ही नहीं.’ तब आप क्या कहेंगे ? ये कहने में कितनी बेचारगी होगी कि कहानी तो बनी थी पर उसे बैन कर दिया गया.

(डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: Controversy, Film, Kerala, Kerala Latest News


Source link

एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!