बुंदेलखंड में पानी की समस्या, सूख रहे है कुएं और तालाब, पानी की समस्या से होती है छात्राओं की पड़ाई बर्बाद

बुंदेलखंड में सूखे की समस्या से निपटने के लिए पिछले एक दशक में राज्य सरकार ने पानी की अबाध पूर्ति के दावे और वायदे किए,करोड़ों  रुपये झोंके, कई  कुएं तालाब और वृक्षारोपण की योजनाएं चलाईं , लेकिन कहीं नहीं पहुंची; गांवो और कस्बों में अप्रेल  के महीने में ही सूखते कुएं और तालाब अपनी कहानी खुद ब्याँ  कर  रहे हैं , बुन्देलखण्ड के विकास पर पानी की कमी और भूमि अनुपजाऊ दो तरफा प्रहार करते हैं, औद्योगिक विकास शून्य है, नौकरी की प्राप्ति तो एक सपना है, फलतः देहातों से निगर्मन दर अत्यधिक ३९ प्रतिशत है जबकि सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में यह मात्र ११ प्रतिशत है। इस प्रदेश के निवासियों के पास ५-१० एकड़ जमीन है किन्तु दो वक्त का भोजन पाने में असमर्थ हैं।

गर्मी की दस्तक से पानी  की वही पुरानी चिंता सताने कुएं है ,  पानी का स्तर गिरता जा रहा है और जो थोड़ा पानी बचा है वो अब इतना मटमैला हो चुका है कि पीने के काम नहीं आ सकता, बुंदेलखंड की आम जनता कई जगह सूखे की मार झेल रही है कुएं के बाद हैंडपंपों की बारी  हैं घर की महिलाओं खास तौर पर छात्राओं को  दिन में पंद्रह बीस चक्कर लगाकर पानी भरना पड़ता है  जिससे की न केवल यह परिवार पानी की समस्या झेल रहे है बल्कि इन घरों की बच्चियाँ पानी भरते भरते अपनेजीवन को मिट्टी मे मिला रही है 

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