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नॉर्थ-ईस्ट राज्यों के कुछ क्षेत्रों से AFSPA हटने से क्या सेना के ऑपरेशन पर असर पड़ा है?

कोलकाता. थलसेना की पूर्वी कमान के जनरल कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता ने शुक्रवार को कहा कि हाल के वर्षों में पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति में काफी हद तक सुधार हुआ है और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ क्षेत्रों से आफ्सपा हटाए जाने से सेना के अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ा है.

उन्होंने कहा कि पूर्वी थिएटर में सेना यह सुनिश्चित करने के लिए गांवों को मॉडल के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है कि आजीविका की तलाश में कोई पलायन न हो. गौरतलब है कि इस साल एक अप्रैल को नगालैंड, असम और मणिपुर के कई इलाकों से आफस्पा हटा लिया गया था.

कलिता ने कहा, ‘हाल के वर्षों में पूरे पूर्वोत्तर में आंतरिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है. सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (आफ्सपा) असम, नगालैंड और मणिपुर के कुछ जिलों से वापस ले लिया गया है. इसे हटाना मनमानी नहीं था, हितधारकों के साथ काफी विचार-विमर्श के बाद इसे वापस लिया गया था.’

प्रेस क्लब, कोलकाता में ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘विशेष शक्तियों को हटाने से सेना के अभियान में किसी भी तरह से बाधा नहीं आ रही है.’ सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (आफस्पा), 1958 के तहत सशस्त्र बलों के संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए एक भौगोलिक स्थान को अशांत क्षेत्र घोषित किया जाता है.

आफस्पा सुरक्षा बलों को बिना किसी पूर्व वारंट के अभियान चलाने और किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार देता है. इसके अलावा गोलीबारी में किसी व्यक्ति की जान जाने पर यह सुरक्षा बलों को गिरफ्तारी और अभियोजन से छूट भी प्रदान करता है.

Tags: AFSPA, Assam, Indian army, Meghalaya, Nagaland


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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