खास खबरडेली न्यूज़मध्यप्रदेश

आर्थिक तंगी से परेशान पत्नी दिव्यांग पति को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंची: इलाज और अनुकंपा नियुक्ति की लगाई गुहार

छतरपुर  लवकुश नगर के परसानिया की रहने वाली प्रियंका गौड़ मंगलवार को एक बार फिर अपने पति को गोद में उठाकर जनसुनवाई में पहुंचीं। शादी के एक साल बाद ही पति सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तब से वे चल नहीं पाते। पत्नी अब पति के इलाज और अनुकंपा नियुक्ति के लिए गुहार लगा रही है।

एक्सीडेंट के बाद से ही चल नहीं पाता पति
साल 2017 में अंशुल गौड़ (30) की शादी प्रियंका गौड़ (23) से हुई थी। शादी के एक साल बाद ही अंशुल एक हादसे का शिकार हो गया। उसके पैर और कमर में गंभीर चोटें आई थीं। उन्हें सर्वाइकल पेन (लकवा) की बीमारी हो गई।

आर्थिक तंगी से परेशान प्रियंका अपने पति के इलाज और मां के स्थान पर उसे अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। लेकिन अब तक उसे कहीं से मदद नहीं मिली है।
मेरे पति दिव्यांग, कैसे उन्हें डीएड-बीएड कराऊं
प्रियंका ने बताया कि मैं सीएम आवास तक गई, लेकिन मेरी समस्या का निराकरण नहीं हुआ। मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर से मिलने आई। साहब बोले उनकी मां अध्यापक के पद थी आपके पति की योग्यता अध्यापक के स्तर की नहीं है, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती है। मेरे पति विकलांग है मैं कैसे उन्हें डीएड-बीएड कराऊं। मैं बीए पास हूं लेकिन मुझे नियुक्ति नहीं मिल सकती है। मैं भोपाल पति को ले जाकर CM हाउस में CM से मिलने पहुंची थी, लेकिन 1 सप्ताह के इंतज़ार के बाद भी CM से नहीं मिल सके।

मैं 5 साल से न्याय के लिए भटक रही
दंपती का कहना है कि वे पिछले 5-6 सालों से परेशान हैं। छतरपुर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार मदद मांग चुके हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। प्रियंका का कहना है कि मैं पति को अनुकंपा नियुक्ति और इलाज के लिए करीब 5 साल से गोद में लेकर शासकीय कार्यालयों में भटक रही हूं। मैं क्षेत्रीय सांसद और BJP प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से भी मिल चुकी हूं।

लाखों रुपए कर्ज हो गया, इलाज के लिए पैसे नहीं
आर्थिक तंगी से परेशान गंभीर परिस्थिति में प्रियंका जैसे-तैसे जेवर बेचकर 1 लाख 30 हजार रुपए लेकर कानपुर पहुंची। जहां न्यूरोन हॉस्पिटल में पति अंशुल का इलाज करा रही थीं। वहां 1 माह 10 दिन भर्ती रहने के दौरान उनका सारा पैसा खर्च हो गया, और अब पैसा न हो पाने के कारण 9 जुलाई को वह छतरपुर अपने गांव वापस आ गई। प्रियंका और उनके पति का कहना हैं कि उन पर लोगों का 3 लाख से अधिक का कर्ज हो गया है। जिसे पटा पाना मुश्किल हो रहा है। ऊपर से इलाज के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

मैं जिंदगी भर साथ पति का साथ निभाऊंगी
प्रिंयका गौर ने कहा कि मैं ज्योति मौर्या के जैसे नहीं हूं जिसने SDM बनने के बाद अपने पति को छोड़ दिया। मैं आखिरी दम तक पति का साथ दूंगी। उनका इलाज करवाऊंगी। मेरे लिए वो ही सब कुछ है। कर्ज लेकर गुजर-बसर कर रही हूं। मेरे ऊपर साढ़े 3 लाख रुपए को कर्ज हो गया है। मैंने कलेक्टर साहब को आवेदन दिया है कि मेरे पति का इलाज कराएं। मैं इलाज कराने लायक नहीं बची हूं। कलेक्टर ने कहा इंतजार करिए। पति की सरवाईकल पैन की बीमारी के लिए हर महीने की दवा 8-10 हजार रुपए में पड़ती है। मुझे 5-6 साल इलाज कराते-कराते हो गया। इसलिए कलेक्टर साहब से इलाज के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।

मां टीचर थी, 2015 में हो गई थी मौत
अंशुल ने कहा कि उसकी मां की मौत साल 2015 में एक दुर्घटना में हो गई थी। उसकी मां विकासखंड गौरिहार के ग्राम कितपुरा में शासकीय हाईस्कूल में अध्यापक के पद पर पदस्थ थीं। उनकी आगजनी में मौत हो गई थी। अब वह उनकी अनुकंपा नियुक्ति की मांग करता फिर रहा है।

एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!